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नई दिल्ली: धार्मिक स्थलों पर समानता और प्रबंधन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव और धार्मिक संस्थानों के संचालन से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साफ कर दिया कि किसी भी संस्था के पास 'अव्यवस्था' फैलाने की आजादी नहीं है।
प्रमुख बिंदु:
• प्रबंधन का अर्थ अराजकता नहीं: कोर्ट ने कहा कि किसी धार्मिक संस्था को अपने मामलों के प्रबंधन का अधिकार (Right to Manage) होने का मतलब यह कतई नहीं है कि वहां कोई ढांचा या नियम न हो। प्रबंधन के नाम पर अराजकता को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
• नियमों की अनिवार्यता: कोर्ट ने जोर देकर कहा कि ऐसी संस्थाओं के सुचारू कामकाज के लिए एक स्पष्ट व्यवस्था और नियमों का होना अनिवार्य है।
• भेदभाव पर कड़ा रुख: केरल के सबरीमाला मंदिर सहित अन्य धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव के संदर्भ में यह टिप्पणी काफी अहम मानी जा रही है।
अदालत की टिप्पणी का महत्व
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संविधान के तहत मिलने वाले धार्मिक अधिकार पूर्णतः बेलगाम नहीं हैं। संस्थाओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनका संचालन पारदर्शी हो और किसी भी व्यक्ति के मौलिक अधिकारों का हनन न हो। कोर्ट के इस रुख से आने वाले समय में धार्मिक स्थलों के प्रशासनिक ढांचे में बड़े सुधार देखने को मिल सकते हैं।
ब्यूरो रिपोर्ट, डिजिटल न्यूज़ डेस्क