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नागपुर:आज के आधुनिक दौर में इमारतों, दफ्तरों और सोसायटियों में 'फायर फाइटिंग सिस्टम' लगाना एक कानूनी अनिवार्यता बन गई है। दीवारों पर टंगे लाल सिलेंडर (Fire Extinguishers) और छतों पर लगे पाइप हर जगह नजर आते हैं, लेकिन एक कड़वी सच्चाई यह भी है कि किसी आपातकालीन स्थिति में 90% लोगों को यह पता ही नहीं होता कि इनका इस्तेमाल कैसे करना है।
हाल ही में हुई आगजनी की कुछ घटनाओं में यह देखा गया कि उपकरण मौके पर मौजूद थे, लेकिन सही समय पर सही तकनीक का इस्तेमाल न होने के कारण मामूली आग ने भी विकराल रूप धारण कर लिया।
सिर्फ उपकरण होना काफी नहीं, जानकारी जरूरी
अक्सर देखा जाता है कि लोग सुरक्षा के नाम पर सिलेंडर तो लगवा लेते हैं, लेकिन उनकी ट्रेनिंग और 'जन-जागरण' (Public Awareness) का अभाव है। विशेषज्ञों का कहना है कि आग लगने के शुरुआती 2 से 5 मिनट सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। अगर उस समय मौजूद व्यक्ति को उपकरण चलाना आता हो, तो बड़े नुकसान को टाला जा सकता है।
कैसे बुझाएं आग? याद रखें PASS फॉर्मूला
ज्यादातर लोग आग लगने पर घबरा जाते हैं। फायर सेफ्टी एक्सपर्ट्स एक आसान तरीका बताते हैं जिसे 'PASS' कहा जाता है:
1. P (Pull): सबसे पहले सिलेंडर के हैंडल में लगी सेफ्टी पिन को खींचकर निकाल दें।
2. A (Aim): पाइप का मुंह आग की लपटों की ओर नहीं, बल्कि आग के बिल्कुल निचले हिस्से (Base) की तरफ रखें।
3. S (Squeeze): सिलेंडर के लीवर को धीरे से दबाएं ताकि गैस या पाउडर बाहर निकले।
4. S (Sweep): पाइप को दाएं-बाएं झाड़ू की तरह घुमाएं जब तक कि आग पूरी तरह बुझ न जाए।
सावधानी जो जान बचा सकती है
• नियमित ड्रिल: हर सोसाइटी और ऑफिस में हर तीन महीने में मॉक ड्रिल होनी चाहिए।
• एक्सपायरी चेक: यह सुनिश्चित करें कि आपके पास मौजूद सिलेंडर रिफिल किया हुआ हो और एक्सपायर न हुआ हो।
• आग के प्रकार: बिजली की आग पर पानी न डालें, वहां केवल CO2 या ड्राई पाउडर वाले सिलेंडर का ही उपयोग करें।
निष्कर्ष:
आग से सुरक्षा केवल सरकार या विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। "सुरक्षा के उपकरण दीवारों की शोभा बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि जान बचाने के लिए हैं।" अगर हम इन्हें चलाना नहीं सीखेंगे, तो ये मात्र लोहे के डिब्बे बनकर रह जाएंगे। वक्त आ गया है कि हम 'जन-जागरण' के जरिए हर नागरिक को 'फायर फाइटर' बनाएं।
बने रहें सुरक्षित, जागरूक बनें।