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काठमांडू/नई दिल्ली: नेपाल सरकार द्वारा सीमा पार व्यापार को लेकर लागू किए गए नए '100 रुपये नियम' ने सीमावर्ती क्षेत्रों और स्थानीय व्यापारियों के बीच भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। काठमांडू की सड़कों पर बालेन शाह की सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं, जिस पर अब भारत ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है।
क्या है पूरा विवाद?
नेपाल सरकार ने हाल ही में एक नियम लागू किया है जिसके तहत भारत से आने वाले सामान पर सीमा शुल्क और कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं। स्थानीय स्तर पर इसे '100 रुपये नियम' के रूप में देखा जा रहा है। सरकार का तर्क है कि यह कदम इनफॉर्मल ट्रेड (अनौपचारिक व्यापार) और स्मगलिंग (तस्करी) को रोकने के लिए उठाया गया है। हालांकि, छोटे व्यापारियों और आम जनता का कहना है कि इससे रोजमर्रा की जरूरतों और सीमा पार व्यापार पर बुरा असर पड़ रहा है।
भारत सरकार का आधिकारिक बयान
प्रदर्शनों के बीच भारतीय विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को इस मामले पर बयान जारी किया है। विदेश मंत्रालय ने कहा:
प्रदर्शनकारियों की मांग
नेपाल में प्रदर्शन कर रहे लोगों का मानना है कि बालेन शाह सरकार के इस फैसले से मध्यम और निम्न वर्ग के व्यापारियों की आजीविका पर संकट आ गया है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और इस नियम को वापस लेने की मांग की है।
आगामी स्थिति
सीमावर्ती इलाकों में व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित होने के कारण आने वाले दिनों में तनाव और बढ़ने की आशंका है। भारत और नेपाल के बीच के आर्थिक संबंधों के लिहाज से यह घटनाक्रम काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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