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प्रयागराज: उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि दो वयस्क आपसी सहमति से साथ रह रहे हैं, तो उनकी पसंद सर्वोपरि है, भले ही उनमें से कोई पहले से शादीशुदा ही क्यों न हो।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला शाहजहांपुर जिले का है, जहाँ एक विवाहित पुरुष और एक युवती लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे थे। युवती के परिवार ने इस रिश्ते का विरोध करते हुए पुरुष के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज कराया था। परिवार का तर्क था कि क्योंकि पुरुष पहले से शादीशुदा है, इसलिए यह रिश्ता गैरकानूनी है।
कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणियां:
जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए निम्नलिखित अहम बातें कहीं:
• कानून बनाम नैतिकता: कोर्ट ने कहा कि "नैतिकता और कानून को अलग-अलग रखा जाना चाहिए।" सामाजिक राय या नैतिकता के आधार पर किसी के कानूनी अधिकारों को नहीं छीना जा सकता।
• वयस्कों की सहमति: अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि दो वयस्क अपनी मर्जी से साथ रहने का फैसला करते हैं, तो यह कोई अपराध नहीं है।
• सुरक्षा का आदेश: हाईकोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया कि वे इस जोड़े को सुरक्षा प्रदान करें और परिवार की ओर से उन्हें परेशान न किया जाए।
सोशल मीडिया पर चर्चा
न्यूज़ 24 की इस रिपोर्ट के बाद सोशल मीडिया पर एक नई बहस छिड़ गई है। जहाँ कुछ लोग इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता की जीत मान रहे हैं, वहीं कुछ इसे भारतीय पारिवारिक ढांचे के लिए चुनौती बता रहे sabhar